कोलगेट से बवासीर का इलाज- Colgate se bawaseer ka ilaj

Colgate se bawaseer ka ilaj : दुनियाभर में कई लोग बवासीर की बीमारी से पीड़ित हैं। अगर इस रोग का इलाज शुरूआत में अच्छे से किया जाए तो यह जड़ से ठीक हो सकती है। अगर ये समस्या ज्यादा समय तक रहती है, तो यह बहुत दर्दनाक बन जाती है। बवासीर के इलाज के लिए अनेक दवाएं मौजूद है, इनका उपयोग करके आप इस रोग में लाभ उठा सकते हैं। कुछ लोग पाइल्स के रोग में घरेलू उपचार का प्रयोग करते हैं। क्या आप जानते है कि कोलगेट से बवासीर को दूर किया जा सकता है। कोलगेट से बवासीर के इलाज (Colgate se bawaseer ka ilaj) के बारे में जानने के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें।

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बवासीर (हेमरॉइड्स) क्या हैॽ

बवासीर मलद्वार में होने वाला रोग है, इस रोग को पाइल्स, मूलव्याधि और कहीं-कहीं पर महेशी के नाम से जाना जाता है। बवासीर में रोगी को मलत्याग के समय बहुत दिक्कत होती है, इस बीमारी में गुदा के अन्दर, बाहर और रेक्टम (मलाशय) के नीचले भाग की शिराओं में सूजन आ जाती है। इसके कारण ऐनस के अन्दर और बाहर किसी भी स्थान पर मस्से बन जाते है। बवासीर की बीमारी मे होने वाले दर्द को सहन करना बहुत मुस्किल होता है। बवासीर के लक्षण दिखने पर इसका इलाज तुरन्त किया जाए तो यह जड़ से ठीक हो सकती है। इस लिए इसके लक्षण जानना बेहद जरूरी है। चलिए इस लेख के माध्यम से बवासीर के लक्षण के बारे में विस्तारपूर्वक बताते हैं।

बवासीर (पाइल्स) के लक्षण।

बवासीर के लक्षण इस प्रकार दिखते है, जैसे मलत्याग के समय दर्द होना, गुदा में जलन और खुजली होना, बैठते समय दिक्कत महसूस होना, शौच के बाद भी पेट का साफ न होने का आभास होना और बार-बार मल त्याग करने की इच्छा होना इत्यादि, लक्षण दिखने पर किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

बवासीर (पाइल्स) होने पर सावधानियां।

यदि किसी को बवासीर के लक्षण दिख रहे हैं या बवासीर का रोग पहले से है, तो कुछ सावधानियां बनाए रखनी चाहिए। चालिए आपको बता दें, कि क्या- क्या सावधानी बनाए रखनी चाहिए।

  • मिर्च मसाले वाली चीजों से दूर रहें।
  • चाय कॉफी का सेवन न करें।
  • तले हुए पदार्थों से दूर रहें।
  • डेयरी उत्पादों का सेवन न करें।
  • अधिक से अधिक हरी सब्जियां, फल और जूस इत्यादि का सेवन करें।
  • दिन में कम–से–कम तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए।

क्या कोलगेट से बवासीर का इलाज किया सकता है  (Colgate se bawaseer ka ilaj)

बवासीर के रोग में लाभ पाने के लिए लोग अनेक तरह के घरेलू नुस्खों का प्रयोग करते है। कुछ अफवाह और चर्चाएं कोलगेट पर भी हैं कि कोलगेट से बवासीर का इलाज किया जा सकता हैं। टूथपेस्ट में आमतौर पर बेंकिंग सोडा, मेंथॉल, हाइड्रोजन पेरोक्साइड और स्वास्थ्य को अच्छा रखने वाले जरूरी पोषक तत्व और गुण पाए जाते हैं। बवासीर के इलाज में कुछ हद तक कोलगेट लाभदायक माना जाता है। इसके उपयोग से बवासीर के कारण गुदा में होने वाली सूजन और जलन में राहत ताे मिलती है लेकिन बवासीर ठीक नहीं होती है। बवासीर से परेशान रोगी के एनल कैनॉल (गुदा नलिका) में मस्से बन जाते हैं‚ जिसके कारण बवासीर में दर्द‚ जलन और सूजन रहती है। बवासीर को जड़ से समाप्त करने के लिये रोगी को मस्सों को सुखाने वाली दवाओं को खाना चाहिये। दवा बाजार में या ऑनलाइन कुछ चुनिन्दा दवायें मिल जाती हैं जो बवासीर के मस्सों को सुखाने का कार्य करती है। एक बार मस्से सूख जाते हैं तो बवासीर की शिकायत ठीक हो जाती है।

इसे पढ़ें– बवासीर के मस्सों को सुखाने दस सर्वश्रेष्ठ दवायें।

कोलगेट क्या है

कोलगेट का उपयोग दांतो की सड़न और मसूड़ो में आने वाली सूजन को दूर करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग भारतवर्ष के ग्रामीण इलाकों में अधिक किया जाता हैं। दांतो को साफ करने के अलावा इसका उपयोग लोग अलग-अलग तरह से कर लेते हैं। चलिए इस लेख को पढ़ कर कोलगेट से बवासीर का इलाज के बारे में जानते हैं।

कोलगेट के उपयोग से बवासीर में लाभ (Piles treatment with Colgate)

बहुत से लोग घरेलू उपचार के तौर पर कोलगेट से बवासीर का इलाज करते हैं। कोलगेट में ठंडक का एहसास करने वाले गुण मौजूद होते हैं इसलिये गुदा क्षेत्र में कोलगेट का पेस्ट लगाने से ठंडक का एहसास होता है। इसमें सूजन रोधी गुण मौजूद होने के कारण सूजन को कम करने में सहायता करता है और मल त्यागने में आसानी होती है। कोलगेट के उपयोग से दर्द जलन में भी लाभ होता है। लेकिन कोलगेट से बवासीर का इलाज सम्भव नहीं है। बवासीर को जड़ से समाप्त करने के लिये रोगी को ऐसी दवा का प्रयाेग करना चाहिये जो बवासीर के मस्सों को सुखा सके। बाजार में बहुत सी ऐसी दवायें उपलब्ध हैं जो कि मस्सों को जड़ से सुखा कर खत्म कर देतीं है।

इसे पढ़ें– बवासीर के मस्सों को सुखाने के टॉपटेन दवायें

बवासीर से राहत पाने के लिए कोलगेट का उपयोग इस प्रकार से करें

चलिए आपको बताते हैं, कि कोलगेट से बवासीर का इलाज कैसे करते है। कोलगेट का उपयोग करना बहुत ही आसान है, सबसे पहले गुनगुने जल से प्रभावित स्थान को साफ कर लेना चाहिए, उसके बाद हल्का साबुन लेकर साफ करें। साफ करने के बाद कुछ समय के लिए छोड़ दें, फिर सूखने पर कोलगेट पेस्ट की पतली परत को उंगलियों पर रखकर सीधा प्रभावित स्थान पर लगाकर एक रात के लिए छोड़ दें और सुबह होने पर इसे धो दें। कोलगेट का इस प्रकार से प्रयोग करके बवासीर के रोग में लाभ उठा सकते हैं। यदि मलत्याग के समय खून आ रहा हो या इसके लक्षण गंभीर दिख रहे हों तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

कोलगेट और कपूर के उपयोग से बवासीर रोग में फायदा।

कोलगेट से बवासीर का इलाज करने के लिये काेलगेट का पेस्ट उपयोग में लाया जाता है। कोलगेट और कपूर का पेस्ट लगाने से बवासीर में होने वाली जलन, खुजली और दर्द से काफी फायदा मिलता है। इसका पेस्ट बनाने के लिये एक छोटा चम्मच सफेद कोलगेट और कपूर को लें फिर कोलगेट में शुद्ध कपूर पीसकर मिला लें।  कपूर और कोलगेट से बने इस पेस्ट को लगाने से पहले प्रभावित स्थान को सूती कपड़े से साफ कर लें, उसके बाद इस पेस्ट को हल्के हांथो से लगाएं।

निष्कर्ष- इस लेख को पढ़कर आप को जनकारी मिली होगी कि, बवासीर क्या है, इसके लक्षण क्या हैं, इसमें क्या-क्या सावधानियां होनी चाहिए, कोलगेट क्या है, कोलगेट से बवासीर का इलाज कैसे करें । यह एक घरेलू नुस्खा है जो कभी–कभी फायदा करता है परन्तु बवासीर के रोग को पूर्ण रूप से खत्म करने के लिये रोगी को आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करना चाहिये जिससे कि बवासीर का मस्सा सूख कर खत्म हो सके। बाजार में बहुत सी ऐसी आयुर्वेदिक दवायें मौजूद हैं जिनके सेवन से बवासीर का मस्सा सुखाया जा सकता है।

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लोगों द्वारा पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर।

बवासीर होने का मुख्य कारण क्या हो सकता हैॽ

बवासीर (पाइल्स) होने के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें से कब्ज सबसे मुख्य कारणों में से एक है। इसके अलावा अधिक मोटापे के कारण भी बवासीर हो सकता है, कभी-कभी महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का बजन बढ़ने के कारण बवासीर का रोग हो जाता है।

बवासीर कितने प्रकार की होती हैॽ

बवासीर दो प्रकार की होती है, 1. खूनी बवासीर 2. बादी बवासीर। खूनी बवासीर में मलत्याग के समय खून आता है, बादी बवासीर में खुजली, जलन और दर्द जैसी समस्याएं होती है।

बवासीर के लक्षण कैसे दिखते हैंॽ

बवासीर रोग में कई लक्षण दिखायी देते हैं। जैसे, गुदा भाग में खुजली, जलन, सूजन और दर्द का होना, मल त्याग के समय खून आना, शौच के बाद भी पेट का साफ न होने का आभास होना और बार-बार मल त्याग करने की इच्छा होना इत्यादि।

बवासीर (पाइल्स) रोग होने पर किस तरह का भोजन नही लेना चाहिएॽ

इस रोग में मिर्च–मसाले वाला भोजन न करें, चाय और कॉफी का भी उपयोग न करें। डेयरी उत्पाद जैसे, पनीर, दूध, चॉकलेट, आइसक्रीम इत्यादि पदार्थों के साथ –साथ ज्यादा तैलीय भोजन का सेवन नहीं करना चाहिये।

क्या कोलगेट का उपयोग करके बवासीर में लाभ पा सकते हैंॽ

जी हां, बवासीर के रोग में कोलगेट के उपयोग से जलन वाले स्थान पर ठंडक का एहसास होता है और दर्द में काफी लाभ पाया जा सकता है।

बवासीर में लाभ पाने के लिए कोलगेट का उपयोग किस प्रकार से करना चाहिएॽ

बवासीर की समस्या कोलगेट का प्रयोग गुदा क्षेत्र में कोलगेट का लेप लगा कर किया जाता है। पेस्ट लगाने से पहले प्रभावित स्थान को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए फिर कोलगेट के पेस्ट की पतली परत को उंगलियों पर रखकर सीधा प्रभावित स्थान पर लगाकर एक रात के लिए छोड़ देना चाहिये और सुबह होने पर इसको धो देना चाहिये। इससे बवासीर में होने वाले दर्द से राहत मिलती है।

क्या बवासीर में कपूर और कोलगेट का प्रयोग करने से लाभ मिलता हैॽ

जी हां, बवासीर (पाइल्स) के रोग में कपूर और कोलगेट के उपयोग से दर्द, जलन और खुजली में लाभ मिलता हैं।

बवासीर के रोग में कोलगेट के साथ कपूर का उपयोग कैसे करेंॽ

एक चम्मच कोलगेट के पेस्ट में एक चम्मच शुद्ध कपूर मिला कर पेस्ट बना लें, फिर इस पेस्ट को लगाने से पहले प्रभावित स्थान को साफ कर लें, उसे बाद इस पेस्ट को हल्के हांथो से लगाएं, इसे लगाने से बवसीर में होने वाली खुजली, जलन और दर्द में लाभ मिलता है।

बवासीर होने पर किस प्रकार का आहार लेना चाहिएॽ

बवासीर में अंकुरित अनाज को खाने से फायदा मिलता है, क्योकि अंकुरित अनाज में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इसके अलावा अधिक से अधिक हरी सब्जियां, फल, जूस, फलिया, दही, मठ्ठा इत्यादि का सेवन करना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।

बवासीर किस उम्र में होता हैॽ

आजकल बवासीर की समस्या सभी उम्रवर्ग के व्यक्तियों में देखी जाने लगी है। वैसे बवासीर (पाइल्स) की बीमारी को 45 से 65 साल की उम्र के व्यक्तियों में ज्यादा देखी जाती है।

बवासीर की आखिरी स्टेज क्या हैॽ

बवासीर को कई ग्रेड में बांटा गया है और आखिरी स्टेज चतुर्थ ग्रेड है जिसमें मस्सों आ आकार काफी बड़ा हो जाता है और वे बाहर निकले हुये रहते हैं और उनमें खून भी आता है। रोगी दर्द से बेहाल रहता है।

बवासीर को बिना ऑपरेशन ठीक करने वाली टॉपटेन दवायें

नम्बर -1 : हीमोहाईड पाउडर (Hemohide Powder)

नम्बर -2 : एनोफिट किट (Anofit Kit)

नम्बर -3 : अर्शकल्प कैप्सूल (Arsh Kalp Capsule)

नम्बर -4 : पाइलेक्स टेबलेट

नम्बर -5 : तंजलि दिव्य अर्शकल्प वटी

नम्बर -6 : पायलो चेक टेबलेट  

नम्बर -7 : पाइलोकिट (PiloKit)  

नम्बर -8 : पाईल्स मेट्रिक्स किट (Piles Matrix Kit)

नम्बर -9 : डॉ० वैद्याज पाइल्स टेबलेट (Dr Vaidyas Piles Teblet)

नम्बर -10 : डॉ पाइल्स फ्री (Dr. Piles Free)

सन्दर्भ :

World J Gastroenterol. 2015 Aug 21; 21(31): 9245–9252 : Treatment of hemorrhoids: A coloproctologist’s view


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